क्या आप हर बात में बहुत अधिक सोचते हैं? आप किसी बात पर जल्दी कोई फैसला नहीं ले पाते और उसी के बारे में सोच सोचकर रातों की नींद ख़राब करते हैं? नकारात्मक जीवन, काम और संबंधों के बारे में किसी उद्देश्यपूर्ण चीज़ की तलाश में हैं? एक बार अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, ‘अक़्ल स्कूल में पढ़ाई करने से नहीं आती बल्कि उसको हासिल करने के जीवनपर्यंत प्रयास से आती है।’
इस पुस्तक में मन को उन्नत और हृदय को रूपांतरित करने वाली 40 कहानियों के साथ गौरांग दास आपको अंतर्मन की खोज यात्रा पर ले जाते हैं। आशाओं की ऊँचाइयों से परे, असहमतियों की घाटियों से होते हुए, आत्मवंचना के तलों से होकर। इस तरह वे आपको अपने हृदह के गृह के पास ले आते हैं, आपको समर्थ बनाते हैं कि आप द्वार खोलकर अपना परिचय प्राप्त करें, और अंततः अपने वास्तविक रूप से आपका परिचय हो सके।